हरियाणा के एक दर्जन किसानों के लिए विशेष हो गया 77वां गणतंत्र दिवस
12 किसानों में जींद के सबसे ज्यादा पांच किसान, रेवाड़ी के किसान को एटहोम का न्यौता भी

Satyakhabar, Haryana
Republic Day : देश का 77वां गणतंत्र दिवस हरियाणा के किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। प्रदेश के 12 किसानों को गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इन विश्व सबसे ज्यादा पांच किसान जींद जिले के रहने वाले हैं। रेवाड़ी के यशपाल खोला को एट होम का भी निमंत्रण मिला है। एटहोम में प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल भी शामिल होता है। यह अपने आप में एक विशेष बात है।
किन-किन किसानों को मिला न्यौता
गणतंत्र दिवस परेड के लिए जिला जींद से गांव अहिरका के प्राकृतिक खेती के किसान व प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र व उनकी पत्नी सुमित्रा रानी, ढाटरथ गांव के ईश्वर अत्री व उनकी पत्नी अंग्रेजो देवी, खरकरामजी गांव के मनजीत सिंह व उनकी पत्नी अनिता रानी, रिटोली गांव के बलिंद्र लोहान व उनकी पत्नी मुकेश देवी, बीबीपुर गांव के राजबीर साहू व उनकी पत्नी पिंकी को विशेष निमंत्रण मिला है। इसके अलावा रेवाड़ी जिले से यशपाल खोला व पत्नी अनीता रानी, रोहतक जिले के चिड़ी गांव से बंसीलाल व पत्नी मुकेश देवी व नांदल गांव से जयप्रकाश व पत्नी कृष्णा देवी, सोनीपत जिले के शहजादपुर गांव से कपिल देव व पत्नी रीना देवी, कैथल जिले के बाता गांव से जॉनी राणा व पत्नी पूजा देवी और यमुनानगर जिले से विजय कुमार व पत्नी निरूपा देवी को भी यह गौरव प्राप्त हुआ है। इनमें से रेवाड़ी जिले के किसान यशपाल खोला को महामहिम राष्ट्रपति की ओर से गणतंत्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले ‘एट होम’ कार्यक्रम में भी शामिल होने का विशेष आमंत्रण मिला है।
कैसे पहुंचेंगे राष्ट्रपति भवन
जानकारी के अनुसार, इन किसानों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आईसीएआर दिल्ली तक खुद जाना होगा। इससे आगे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाने और वहां रहने की पूरी व्यवस्था सरकार करेगी।
यशपाल खोला विशेष मेहमान

रेवाड़ी जिले के गांव कंवाली के किसान यशपाल खोला तीन दिन तक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मेहमान बनेंगे। यशपाल खोला 25 जनवरी को अपनी पत्नी अनीता कुमारी के साथ दिल्ली रवाना होंगे और 28 जनवरी को वापस लौटेंगे। यशपाल ने साल 2018 में पिता की कैंसर से हुई मौत के बाद पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया था। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक खेती की शुरुआत साल 2014 में ही कर दी थी। यशपाल ने न केवल खुद प्राकृतिक खेती को अपनाया, बल्कि एक बड़े रकबे को प्राकृतिक खेती में बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न कृषि संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर न केवल अपने खेतों, बल्कि अन्य किसानों के खेतों में भी प्राकृतिक उत्पादन को सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया है। यशपाल खोला ने प्राकृतिक उत्पादों की रिटेल मार्केटिंग का एक प्रभावी और प्रेरक मॉडल भी विकसित किया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और उपभोक्ताओं तक शुद्ध, सुरक्षित खाद्यान्न पहुंच रहा है। उनका यह मॉडल आज कई किसानों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है। यशपाल खोला का कार्य न केवल मिट्टी और कृषि भूमि के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला है, बल्कि इससे किसानों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा आमजन के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिला है। उनके प्रयासों को राष्ट्रीय निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है। जिसकी सराहना समाज, सरकार और प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही है।
क्या कहती है जींद की पिंकी

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली जींद जिले के गांव बीबीपुर की रहने वाली पिंकी को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन से गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। यह निमंत्रण प्रदेश के चयनित 12 किसानों को दिया गया है, जिनमें पिंकी का नाम भी शामिल है।
पिंकी ने बताया कि उनके पति लंबे समय से प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, ताकि लोगों को रसायनयुक्त भोजन से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके। इस अभियान में पिंकी ने भी अपने पति का पूरा सहयोग किया। वह पढ़ाई के साथ-साथ खेतों में खेती के कार्यों में सक्रिय रूप से हाथ बंटाती हैं। पिंकी का कहना है कि राष्ट्रपति भवन से मिला यह निमंत्रण उनके लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने कहा कि युवाओं को शहरों की ओर पलायन करने के बजाय गांव में रहकर खेती और स्वरोजगार को अपनाना चाहिए, जिससे प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ाव बना रहे। बताया गया है कि पिंकी ने अपने खेतों में ‘सोना मोती’ गेहूं की बुआई की है, जिसे पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाया गया है। खास बात यह है कि उनकी फसल की एडवांस बुकिंग पहले ही हो चुकी है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिंकी ने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे न केवल किसान की आय बढ़ती है, बल्कि समाज को भी स्वस्थ भोजन मिलता है।
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